Tufail-E-Kashish

क़सीदा मुकम्मल नहीं, ये सिलसिला है तुफैल,
हर साँस लिखती रहे—कशिश के हुस्न की किताब

Shayar ✍🏻
Tufail-E-Kashish

कशिश क्या मुहब्बत गुनाह तो नहीं
फिर कियू तड़पाया तरसाया जा रहा है हमे

Shayar ✍🏻
Tufail-E-Kashish

किताबें इश्क़-ए-हुस्न होगा उस किताब का नाम,
जिसमें दास्तान-ए-कशिश लिखा जाएगा

Shayar ✍🏻
Tufail-E-Kashish

ना कर दफन कब्रिस्तान में इस कदर मेरी मुहब्बत,
अभी इसमें जान बाकी है कशिश

Shayar ✍🏻
Tufail-E-Kashish

जिसे एक बार देखने के बाद बार बार देखने को दिल कहे वो हो तुम

Shayar ✍🏻
Tufail-E-Kashish

हमने मुहब्बत को आसान जाना
करली उनसे मुहब्बत उन्होंने मुहब्बत को खेल समझ के रखा

Shayar ✍🏻
Tufail-E-Kashish

तुफैल उनसे इश्क़ है और सुबह कयामत तक रहेगा
उनका मिलना ना मिलना ये मेरे और उनके किस्मत की बात है

Shayar ✍🏻
Tufail-E-Kashish

कशिश हम बोले भी नहीं और कहानी बन गई,
तेरी एक नज़र मेरी ज़ुबानी बन गई।

चुप रहकर भी जो समझ जाए हाल-ए-दिल,
वही तो मोहब्बत की पहली कहानी बन गाई

Shayar ✍🏻
Tufail-E-Kashish

तुफैल तुझे उस काबिल समझा ही नहीं
वरना तेरी मुहब्बत लावारिश नहीं होती

Shayar ✍🏻
Tufail-E-Kashish