क़सीदा मुकम्मल नहीं, ये सिलसिला है तुफैल,हर साँस लिखती रहे—कशिश के हुस्न की किताब
Shayar ✍🏻Tufail-E-Kashish
कशिश क्या मुहब्बत गुनाह तो नहींफिर कियू तड़पाया तरसाया जा रहा है हमे
किताबें इश्क़-ए-हुस्न होगा उस किताब का नाम,जिसमें दास्तान-ए-कशिश लिखा जाएगा
ना कर दफन कब्रिस्तान में इस कदर मेरी मुहब्बत,अभी इसमें जान बाकी है कशिश
जिसे एक बार देखने के बाद बार बार देखने को दिल कहे वो हो तुम
हमने मुहब्बत को आसान जानाकरली उनसे मुहब्बत उन्होंने मुहब्बत को खेल समझ के रखा
तुफैल उनसे इश्क़ है और सुबह कयामत तक रहेगाउनका मिलना ना मिलना ये मेरे और उनके किस्मत की बात है
कशिश हम बोले भी नहीं और कहानी बन गई,तेरी एक नज़र मेरी ज़ुबानी बन गई।
चुप रहकर भी जो समझ जाए हाल-ए-दिल,वही तो मोहब्बत की पहली कहानी बन गाई
तुफैल तुझे उस काबिल समझा ही नहींवरना तेरी मुहब्बत लावारिश नहीं होती